राजस्थान से मानसून की विदाई का दौर लगातार आगे बढ़ रहा है और IMD के मुताबिक अगले दो-तीन दिनों में राज्य के कई और इलाकों से मानसून पूरी तरह लौट जाएगा। इसका सीधा असर हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर के मौसम पर भी पड़ेगा, जहां अब बारिश की गतिविधियां लगभग थम चुकी हैं।
21 सितंबर यानि आज पूर्वी राजस्थान के कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है, जबकि बारां, झालावाड़, कोटा और प्रतापगढ़ में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। पश्चिमी राजस्थान में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा और गर्मी बढ़ेगी।
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के ताजा बुलेटिन के अनुसार मानसून वापसी की रेखा इस समय 27.0° उत्तरी अक्षांश और 68.0° पूर्वी देशांतर से होते हुए रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला और 29.5° उत्तरी अक्षांश व 71.5° पूर्वी देशांतर तक पहुंच चुकी है। अगले दो-तीन दिनों में राजस्थान के अलावा पंजाब और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। यानी अब उत्तर-पश्चिम भारत से बारिश का मौसम लगभग समाप्त हो चुका है।
राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में स्थिति और साफ है। जोधपुर और बीकानेर संभाग में अगले पांच से सात दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। पूर्वी राजस्थान में भी अगले पांच-छह दिनों तक बारिश की गतिविधियां कम रहेंगी। रविवार को राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान बाड़मेर में 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो साफ संकेत है कि गर्मी का असर फिर लौट रहा है। आसमान साफ होने के साथ दिन के तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
कल 22 सितंबर को उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन बाकी राजस्थान में मौसम शुष्क रहेगा। 23 और 24 सितंबर को प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में मौसम सामान्य रहेगा और विशेष बारिश का अनुमान नहीं है। 25 सितंबर को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, उत्तरी बीकानेर और चूरू जिलों में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का आंशिक असर दिख सकता है, जिससे कुछ जगहों पर मेघगर्जन, तेज हवाएं और हल्की बारिश हो सकती है। कोटा और भरतपुर संभाग में भी स्थानीय स्तर पर मौसम बदल सकता है।
26 और 27 सितंबर को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य रहेगा। 29-30 सितंबर को उत्तरी, पूर्वी और मध्य राजस्थान में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, जो स्थानीय बादलों की वजह से होगी। एक से सात अक्टूबर के बीच भी मौसम सामान्य रहने का अनुमान है, हालांकि कुछ इलाकों में तेज हवा के झोंके चल सकते हैं। अक्टूबर के तीसरे और चौथे सप्ताह में दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना जताई गई है, जिनका असर उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
हरियाणा-एनसीआर पर क्या असर
राजस्थान से मानसून की विदाई का मतलब है कि अब हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में भी बारिश का दौर खत्म हो चुका है। सोनीपत, गन्नौर, गोहाना, करनाल और रोहतक में अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा और दिन का तापमान बढ़ेगा। हालांकि 25 सितंबर के बाद एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे हरियाणा के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन यह मानसून की वापसी नहीं होगी।
किसानों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वहां सिंचाई के इंतजाम अभी से कर लें। धान, सब्जी और बागवानी वाली फसलों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें। मौसम शुष्क होने के साथ कीट-रोग का खतरा भी बढ़ सकता है, इसलिए फसलों की नियमित निगरानी जरूरी है। पशुओं को छाया में रखें और ठंडा पानी पिलाएं। आम लोगों को दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचना चाहिए, खासकर बुजुर्गों और बच्चों को।

