मध्य प्रदेश मौसम, मौसम ब्रेकिंग (भोपाल): मध्य प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मानसून की विदाई के बाद अब बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम प्रदेश में बारिश का नया दौर ला सकता है।
इसका असर करवा चौथ पर भी दिखाई देने की संभावना है, जिससे 29 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बादल, गरज-चमक और बारिश का अनुमान जताया गया है। व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रोदय के समय आसमान साफ मिलने को लेकर चिंता हो सकती है।
मौसम के इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश में दिखने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
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वहीं, छतरपुर, कटनी, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में 24 घंटे के दौरान ढाई से आठ इंच तक बारिश होने की आशंका जताई गई है, जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी आंधी और बारिश का असर रह सकता है।
मौसम केंद्र के अनुसार, 27 अक्टूबर को अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में छिटपुट बारिश हो सकती है। इसके बाद 28 अक्टूबर से मध्य और पूर्वी मध्य प्रदेश के करीब 23 जिलों में गरज-चमक के साथ गतिविधि तेज होने की उम्मीद है।
विभाग ने पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और बालाघाट जिलों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताई है। वहीं, छतरपुर, कटनी, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा और सिवनी में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
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इन इलाकों में अगले कुछ घंटों के दौरान मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ सकता है, हालांकि वास्तविक बारिश की स्थिति मौसमी प्रणाली की दिशा और तीव्रता पर निर्भर करेगी। 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा, जिस दिन सुहागिन महिलाएं चंद्रमा के दर्शन कर अपना व्रत पूरा करती हैं।
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यदि इस दौरान आसमान में घने बादल छाए रहते हैं या बारिश होती है, तो चंद्रोदय के समय चांद के दीदार में बाधा आ सकती है। मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह पूर्व-मध्य और उससे लगे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन क्षेत्र है, जो मजबूत होकर नमी बढ़ा रहा है।
प्रदेश में फिलहाल दिन और रात के तापमान में दो तरह का असर देखने को मिल रहा है। रातें ठंडी होने लगी हैं, जबकि दिन में तेज धूप के चलते कई शहरों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है।
बीते दिनों कटनी के करौंदी में न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। इसके अलावा छिंदवाड़ा में 14.4 डिग्री, इंदौर और मलाजखंड में 14.6 डिग्री, दमोह में 15 डिग्री और शाजापुर में 15.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।
दूसरी ओर, खजुराहो, भोपाल और उज्जैन में अधिकतम तापमान 35.5 से 36.1 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि अमरकंटक में दिन का तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए दौर की बारिश के बाद दिन के तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे ठंडक का अहसास और अधिक बढ़ जाएगा।
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो गई थी, जिसके बाद भी प्रदेश में रुक-रुककर बारिश होती रही। पिछले सप्ताह पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश का असर रहा, हालांकि शनिवार को बारिश का दौर थम गया था।
मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, पिछले 10 साल के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला रुख देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम में ऐसा ही उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जहां महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने और तेज धूप के बाद रात में ठंडक बढ़ी, जबकि अब बारिश का नया दौर बनने के संकेत हैं।
इस साल प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है, जहाँ पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक बताया गया है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में सामान्य से पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में कमी ज्यादा रही, जिसमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई। प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का मौसमी कोटा पूरा हो गया था, जबकि 30 जिलों में कमी बनी रही।
जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश होने का असर पूरे मानसून के आंकड़ों पर पड़ा था, और जुलाई में तेज बारिश से स्थिति सुधरने के बाद भी मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है और इस साल कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम रही।
ऐसे में अक्टूबर के आखिरी दिनों में होने वाली बारिश से कुछ इलाकों को राहत मिल सकती है, लेकिन इसका वास्तविक असर जिलेवार बारिश पर निर्भर करेगा। करवा चौथ पर बारिश और बादलों का पूर्वानुमान होने से चंद्रोदय के समय आसमान की स्थिति अहम रहेगी, हालांकि पूरे प्रदेश में चांद नहीं दिखने की स्थिति अभी निश्चित नहीं कही जा सकती।
बादलों की मात्रा, बारिश के समय और स्थानीय मौसम के आधार पर अलग-अलग शहरों में आसमान की स्थिति बदल सकती है, इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए चंद्रोदय के आसपास मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान देखना उपयोगी रहेगा।









