गुजरात सूखा सहायता, मौसम ब्रेकिंग (गांधीनगर): गुजरात में कम बारिश से प्रभावित किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों की घोषणा की गई।
प्रभावित किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा के भीतर ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।
सरकार के अनुसार, इस वर्ष गुजरात में औसतन करीब 89 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में कम बारिश के कारण कृषि और पशुपालन पर असर पड़ा है।
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भारत सरकार की सूखा निर्धारण गाइडलाइन-2016 के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत के फैसले किए गए हैं।
करीब आठ साल बाद गुजरात में सूखे की स्थिति को देखते हुए राहत उपायों की घोषणा की गई है। इससे पहले वर्ष 2018 में राज्य के 11 जिलों के 51 तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था।
उस समय किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि के लिए ₹6,800 प्रति हेक्टेयर सहायता देने का ऐलान किया गया था। पशुपालकों को रियायती दर पर चारा, बड़े पशुओं के लिए ₹70 और छोटे पशुओं के लिए ₹35 प्रतिदिन की सहायता तथा मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करने जैसे कदम उठाए गए थे।
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पिछले वर्ष भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार ने 7 नवंबर 2025 को ₹10,000 करोड़ के कृषि राहत पैकेज की घोषणा की थी। उस पैकेज के तहत अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि की सीमा में सिंचित और असिंचित फसलों के लिए ₹22,000 प्रति हेक्टेयर सहायता देने का प्रावधान किया गया था।
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इस बार सूखे की स्थिति में घोषित ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता की तुलना में राशि कम है।
कम बारिश के कारण पशुओं के लिए चारे की कमी न हो, इसके लिए सरकार रियायती दर पर चारा उपलब्ध करा रही है। अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा वितरित किया जा चुका है।
पशुपालकों को चारा ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से दिया जा रहा है। सरकार के पास फिलहाल तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
जरूरत बढ़ने पर अतिरिक्त चारे की व्यवस्था भी की जाएगी।
सूखा प्रभावित घोषित तालुका में पशुओं के लिए सहायता योजना अगले दो महीने तक जारी रहेगी। इसके बाद भी जरूरत बनी रहने पर स्थिति की समीक्षा करके आगे का निर्णय लिया जाएगा।
सूखे की स्थिति में ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2026 से ग्रामीण क्षेत्रों में 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त रोजगार देकर आर्थिक कठिनाइयों से राहत देना है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि किसानों और पशुपालकों का हित राज्य सरकार की प्राथमिकता है। संकट के समय सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी और प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।









