जमशेदपुर पटमदा बेमौसम बारिश गेंदा फूल किसान नुकसान, Mausam Breaking (जमशेदपुर, झारखंड): दिवाली और छठ जैसे त्योहारों पर गेंदा फूल की मांग काफी बढ़ जाती है। जमशेदपुर के पटमदा में किसान साल भर इन त्योहारों के लिए फूलों की खेती करते हैं।
यहां से फूल झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा और बंगाल तक भेजे जाते हैं, लेकिन पिछले पांच दिनों से हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में फूलों के पौधे सड़ने लगे हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
जमशेदपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर पटमदा क्षेत्र की पहचान खेती-किसानी से होती है। यहां के किसान हरी सब्जियों के साथ बड़े पैमाने पर फूलों की खेती भी करते हैं।
खासकर गेंदा फूल की खेती किसानों की कमाई का बड़ा जरिया है। पटमदा में सैकड़ों एकड़ जमीन पर गेंदा फूल उगाया जाता है।
दिवाली, छठ और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान इन फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि किसान साल भर इन त्योहारों के सीजन का इंतजार करते हैं।
दिवाली और छठ पूजा में घरों, मंदिरों और पूजा पंडालों को सजाने के लिए गेंदा फूल का खूब इस्तेमाल होता है।
इसकी मांग केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक पटमदा के फूल भेजे जाते हैं। त्योहारों के दौरान अच्छी कीमत मिलने से किसानों को लाखों रुपये की कमाई होती है।
किसानों का कहना है कि धान की खेती के मुकाबले फूलों की खेती कम समय में तैयार हो जाती है और इससे बेहतर आमदनी भी होती है। यही वजह है कि क्षेत्र के कई किसानों ने धान की खेती कम करके फूलों की खेती को प्राथमिकता दी है।
दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले कई लोग भी अपने गांव लौटकर फूलों की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
इस बार किसानों की उम्मीदों पर बेमौसम बारिश ने पानी फेर दिया है। पिछले पांच दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और लगातार बादल छाए रहने के कारण फूलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।
खेतों में पानी भरने और नमी बढ़ने से गेंदा फूल के पौधे सड़ने लगे हैं। कई जगह फूलों का आकार भी छोटा रह गया है।
किसानों के मुताबिक, जिन फूलों से त्योहारों के सीजन में अच्छी कमाई होने की उम्मीद थी, वे ठीक से विकसित ही नहीं हो पाए। छोटे-छोटे पौधे खराब हो गए हैं।
इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिवाली और छठ के समय फूलों की मांग सबसे ज्यादा रहती है, लेकिन इस बार बारिश ने उनकी तैयारी प्रभावित कर दी है।
बारिश से हुए नुकसान के बाद किसान अब उसकी भरपाई करने की कोशिश में जुट गए हैं। कई किसानों ने धान की खेती के लिए रखी जमीन पर दोबारा गेंदा फूल की खेती शुरू कर दी है।
उन्हें उम्मीद है कि नई फसल जनवरी तक तैयार होने लगेगी और जनवरी-फरवरी में फूलों की बिक्री से कुछ नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
किसानों का कहना है कि फूलों की खेती में पूरे परिवार की मेहनत लगती है। दिन-रात खेतों में काम करके फसल तैयार की जाती है।
त्योहारों के सीजन में होने वाली कमाई से ही साल भर के खर्चों का इंतजाम होता है। ऐसे में इस बार बारिश के कारण हुए नुकसान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
पटमदा के किसानों की मेहनत से तैयार गेंदा फूल जमशेदपुर के बाजारों के साथ दूसरे राज्यों तक पहुंचता है। यहां की फूलों की खेती स्थानीय लोगों को रोजगार और किसानों को अच्छी आमदनी देती है।
हालांकि, इस बार मौसम की मार ने त्योहारों के सीजन की तैयारियों को प्रभावित किया है। अब किसानों को जनवरी-फरवरी में तैयार होने वाली नई फसल से उम्मीद है कि उनकी मेहनत रंग लाएगी और बारिश से हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी।











