कम मानसून बारिश एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य खाद्य सुरक्षा, Mausam Breaking (नई दिल्ली): कम बारिश के कारण मक्का और गन्ना उत्पादन पर पड़े असर से एथेनॉल सम्मिश्रण दर गिरकर 15-17% रहने का अनुमान है। बढ़ती खाद्य महंगाई के बीच सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के मुकाबले खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने का रुख अपनाया है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस आपूर्ति वर्ष में पेट्रोल में एथेनॉल का अनुपात घटकर 15 से 17 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, जो आधिकारिक 20 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। आयातित तेल पर निर्भरता घटाने के भारत के अभियान को कम मानसून वर्षा के कारण झटका लगा है।
एक दशक से अधिक समय में सबसे कम मानसून बारिश के चलते मक्का और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। अल नीनो के प्रभाव से मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम रही, जिससे मक्का और चीनी के दाम रिकॉर्ड 40 प्रतिशत तक बढ़ गए, जबकि चावल के दाम 20 प्रतिशत बढ़े हैं।
सितंबर में खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई। केएन एग्री रिसोर्सेज के चेयरमैन और खाद्य नीति विशेषज्ञ जी.के.
सूद के मुताबिक, “भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, इसलिए सूखे वाले वर्ष में ईंधन से पहले भोजन को प्राथमिकता देनी होगी।”
हालांकि सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन एथेनॉल उत्पादकों को रियायती दर पर चावल बेचना सरकार के लिए खर्चीला विकल्प है। एथेनॉल सम्मिश्रण में गिरावट से उन उत्पादकों को भारी नुकसान होगा, जिन्होंने 20 अरब लीटर प्रति वर्ष क्षमता तक विस्तार के लिए भारी कर्ज लिया था।
इसके अलावा, सरकार ने तेल कंपनियों को चीनी आधारित एथेनॉल न खरीदने का निर्देश दिया है और मक्का आधारित एथेनॉल का खरीद मूल्य घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जिससे डिस्टिलरीज का मुनाफा प्रभावित हुआ है। मक्का उत्पादन में भी 15 प्रतिशत तक की गिरावट की आशंका जताई जा रही है, और पानी की कमी के कारण किसान रबी सत्र में भी इसकी बुवाई बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं।











