चक्रवाती तूफान का खेत में खड़ी फसल पर भी खतरा: झारखंड में तेज बारिश की संभावना, धान और आलू की फसल को नुकसान

झारखंड में तेज बारिश: झारखंड में तेज बारिश, मौसम ब्रेकिंग (कोडरमा): बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ऑर्नब के कारण झारखंड के कई जिलों में 28 से 30 अक्टूबर तक तेज हवा और बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे धान की फसल और आलू की बुवाई पर संकट आ गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: झारखंड में तेज बारिश
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: Mr.Rabindra Bagh / Pexels

झारखंड में तेज बारिश, मौसम ब्रेकिंग (कोडरमा): बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘ऑर्नब’ अब बहुत तेज हो गया है। यह तूफान 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसका असर दक्षिणी राज्यों के साथ झारखंड में भी दिखेगा। झारखंड के कई जिलों में 28 से 30 अक्टूबर तक तेज हवा और बारिश की संभावना है।

दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड में इसका प्रभाव ज्यादा रहेगा।

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कटाई और दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, इस मौसमी बदलाव से खेती पर असर पड़ेगा। बारिश के अलर्ट से किसान चिंतित हैं, खासकर धान की खेती करने वाले।

पकी धान की फसल खेतों में गिर सकती है, जिससे कटाई और दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

आलू और अन्य रबी फसलों की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है। 1 नवंबर से मौसम में सुधार की संभावना है।

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लगातार बारिश होने पर खेतों में पानी जमा होने से फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा भी है। वहीं, कटी हुई फसल खुले में रखी होने पर उसके भीगने और सड़ने की आशंका है।

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आलू की बुवाई में देरी हो सकती है जो किसान खेतों में आलू की बुवाई में जुटे हुए हैं, ऐसे में बारिश से खेतों में नमी अधिक होने पर जल भराव की स्थिति बनने पर आलू की बुवाई में देरी हो सकती है। गीली मिट्टी में कंद लगने से सड़न और रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे में किसानों को खेत तैयार करने, मिट्टी चढ़ाने और अन्य कृषि कार्यों में भी बाधा आ सकती है। हालांकि हल्की बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ने का लाभ भी मिल सकता है।

इधर, कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय की माने तो तेज बारिश खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

इसमें मूल रूप से धान की खेती को ज्यादा नुकसान पहुंचने की संभावना है।

बुआई के लिए तीन-चार दिन रुक जाएं खड़ी फसल सूखने में कम समय लगती है। अगर किसान फसल काट चुके हैं तो भीगने से बचाव के लिए त्रिपाल आदि से ढकने की व्यवस्था कर लें।

उन्होंने आलू की बुवाई की तैयारी में जुटे किसानों से अपील की है कि वे फिलहाल बुआई के लिए तीन-चार दिन रुक जाएं। बारिश के बाद जमीन सूखने के बाद ही बुवाई करें।

वैसे किसान जो बुवाई कर चुके हैं वे अपने खेतों में जल जमाव न हो इसका विशेष ध्यान रखें। वहीं उन्होंने कहा कि बारिश के बाद गीली भूमि सरसों की फसल लगाने में सहायक साबित होगी।

बताते चलें कि झारखंड में फिलहाल खेतों में हर ओर धान लगे हुए हैं। धान की खेती लगभग तैयार हो चुकी है।

ऐसे में आने वाले दिनों में अगर बारिश होती है तो फसल के सड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं तेज़ हवाओं के कारण फसल के खेतों में गिरने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।