सुपर अल नीनो मध्य प्रदेश गेहूं फसल सर्दी, Mausam Breaking (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में इस बार सर्दियों का मिजाज बदल सकता है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली सुपर अल नीनो देश के मौसम पर असर डाल सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों ने वर्ष 2026-27 की सर्दी सामान्य से अधिक गर्म और शुष्क रहने की आशंका जताई है। इसका असर सिर्फ ठंड पर ही नहीं, बल्कि किसानों की रबी फसलों पर भी पड़ सकता है।
खासकर गेहूं की फसल को फरवरी और मार्च में बढ़ते तापमान से नुकसान होने की आशंका है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर बुवाई पूरी करने की सलाह दी है।
सुपर अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक होने की स्थिति को कहा जाता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है।
भारत में भी इसके कारण बारिश, तापमान और सर्दियों के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मौसम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मॉडल इस बार मजबूत अल नीनो की संभावना जता रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के 8 अक्टूबर 2026 के पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच अल नीनो के 1950 के बाद सबसे शक्तिशाली होने की 83 प्रतिशत संभावना जताई गई थी।
हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले महीनों के मौसम पर निर्भर करेगा।
सुपर अल नीनो के संभावित प्रभाव से मध्य प्रदेश सहित उत्तर और मध्य भारत में सर्दियों का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इसका मतलब है कि इस बार कड़ाके की ठंड का असर कम देखने को मिल सकता है।
सर्दियों में मौसम सामान्य से ज्यादा गर्म और शुष्क रहने की आशंका है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पूरे प्रदेश में ठंड नहीं पड़ेगी। अलग-अलग जिलों में तापमान और मौसम की स्थिति बदल सकती है।
इसलिए लोगों और किसानों को मौसम विभाग के नियमित पूर्वानुमानों पर नजर रखनी चाहिए।
सुपर अल नीनो का असर किसानों के लिए चिंता बढ़ा सकता है। खासकर गेहूं की फसल के लिए फरवरी और मार्च का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इसी दौरान गेहूं के पौधों में दाने भरने की प्रक्रिया चलती है। अगर इस समय तापमान अचानक बढ़ता है, तो फसल का विकास चक्र प्रभावित हो सकता है।
अधिक गर्मी के कारण गेहूं के दाने छोटे रह सकते हैं और उनका वजन भी घट सकता है। इससे उत्पादन और किसानों की आमदनी दोनों प्रभावित होने का खतरा है।
यही वजह है कि कृषि विशेषज्ञ इस बार बुवाई में देरी नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में दीर्घावधि औसत की तुलना में लगभग 87 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना भी जताई गई है।
ऐसे में रबी फसलों की बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना किसानों के लिए चुनौती बन सकता है।
बारिश की कमी का असर गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों पर पड़ सकता है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुछ इलाकों में बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की स्थिति भी बन सकती है।
मध्य प्रदेश में सितंबर महीने की अच्छी बारिश के कारण बड़े तालाब और बरगी बांध सहित कई प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। नर्मदा घाटी, भोपाल-नर्मदापुरम और जबलपुर के सिंचित इलाकों में गेहूं की खेती को इससे राहत मिल सकती है।
वहीं मालवा, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के असिंचित क्षेत्रों में किसानों को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। इन इलाकों में चना, मसूर और सरसों की खेती के लिए मिट्टी की नमी की कमी परेशानी बन सकती है।
कुछ पश्चिमी जिलों में बारिश की कमी भी दर्ज की गई है। हालांकि, गर्म सर्दी के कारण इन फसलों में पाले का खतरा कुछ कम रह सकता है।
आईसर भोपाल के कृषि एवं मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर रबी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की बुवाई नवंबर के पहले पखवाड़े में पूरी कर लेना बेहतर रहेगा।
इसके साथ ही किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और अधिक तापमान सहन करने वाली किस्मों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
असिंचित क्षेत्रों में कम पानी की जरूरत वाली फसलों का चयन करना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा खेत में नमी बनाए रखने और उपलब्ध पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
आईसर भोपाल के पृथ्वी एवं पर्यावरणीय विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार के अनुसार, अल नीनो मौसम की संभावनाओं को प्रभावित करता है, लेकिन किसी विशेष सप्ताह के मौसम की सटीक भविष्यवाणी नहीं करता।
इसलिए किसानों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के नियमित पूर्वानुमानों के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेने चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फरवरी और मार्च 2027 में तापमान सामान्य से अधिक रहता है, तो गेहूं के दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे दाने का आकार और वजन कम होने की आशंका रहेगी।
इसलिए किसानों के लिए समय पर बुवाई, सही किस्म का चयन और बेहतर सिंचाई प्रबंधन इस बार बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।
सुपर अल नीनो की आशंका ने इस बार मध्य प्रदेश के किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, अभी से पूरी सर्दी और फसलों पर पड़ने वाले असर को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
मौसम की वास्तविक स्थिति आने वाले महीनों में साफ होगी। किसानों को बुवाई से लेकर सिंचाई तक के फैसले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार लेने चाहिए।











