लातूर में भयानक सूखे से हालात गंभीर, सामान्य से 53 फ़ीसदी कम हुई बारिश

लातूर सूखा: लातूर ज़िले में इस साल सामान्य से लगभग 53 फ़ीसदी कम बारिश होने के कारण भीषण सूखा पड़ गया है। बारिश न होने से किसानों की फसलें सूख गई हैं और जलाशयों का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे आम लोगों और मवेशियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: लातूर सूखा
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: rol Estrell / Pexels

लातूर सूखा, मौसम ब्रेकिंग (लातूर): लातूर ज़िले में इस साल सामान्य से लगभग 53 फ़ीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे इलाके में भीषण सूखा पड़ गया है। एक जून से 21 अक्तूबर के बीच औसतन 764 मिलीमीटर बारिश की उम्मीद थी, लेकिन केवल 362 मिलीमीटर बारिश ही हुई है।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक बारिश के अभाव में ज़िले की क़रीब 80 फ़ीसदी फ़सलें ख़राब हो गई हैं। रेणापुर तहसील के गरसुली गांव में किसानों की सोयाबीन और अन्य फसलें पूरी तरह सूख चुकी हैं, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

गरसुली लघु सिंचाई परियोजना का जलाशय पूरी तरह सूख चुका है और उसकी ज़मीन में गहरी दरारें पड़ गई हैं। इसके अलावा पड़ोसी बीड ज़िले के मांजरा बांध में भी पिछले साल के मुकाबले अब केवल 7.84 फ़ीसदी पानी ही बचा है।

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बढ़ते जल संकट को देखते हुए लातूर ज़िला प्रशासन ने जलापूर्ति का चक्र बदल दिया है। शहर में अब चार दिन के बजाय छह दिन में एक बार पानी की आपूर्ति की जा रही है ताकि रिजर्व पानी जुलाई तक चलाया जा सके।

मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ ज़िलों में लातूर में सबसे अधिक 53 फ़ीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। ज़िले के नौ बड़े बांधों में से पांच में अब पानी का कोई भंडार नहीं बचा है, जिससे दस साल पहले 2016 जैसे हालात फिर से पैदा हो रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 305 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है जिसमें लातूर की सभी 10 तहसीलें शामिल हैं। सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए अग्रिम आर्थिक सहायता और राहत उपाय घोषित किए हैं, जबकि किसान प्रति हेक्टेयर 50 हज़ार रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

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Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।