MP Weather: करवा चौथ पर बादलों का पहरा और पूर्वी हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी

MP Weather: मौसम ब्रेकिंग (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम का मिजाज बदल गया है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम के असर से पूर्वी हिस्से में बारिश और आंधी-तूफान का अनुमान है। करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को चांद के दीदार के लिए इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: MP Weather
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: Engin Akyurt / Pexels

MP Weather, मौसम ब्रेकिंग (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी दिनों में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल सकता है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम के असर से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।

इसका असर 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को चांद के दीदार के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है।

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मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 29 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बताया गया है।

वहीं, छतरपुर, कटनी, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा और सिवनी में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कुछ इलाकों में 24 घंटे के दौरान ढाई से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है।

अन्य जिलों में भी बादल छाने, गरज-चमक और आंधी के साथ बारिश हो सकती है।

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मौसम में इस बदलाव की वजह बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी सिस्टम को बताया जा रहा है। पूर्व-मध्य और उससे सटी दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र विकसित होकर डिप्रेशन में बदल गया है।

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इसके और मजबूत होने की संभावना है।

इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में एक अन्य चक्रवाती परिसंचरण के भी मजबूत होने का अनुमान है। इसके चक्रवाती तूफान में बदलने से मध्य भारत के मौसम पर असर पड़ सकता है।

इसी सिस्टम के प्रभाव से मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो चुकी है। इसके बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है।

पिछले दिनों पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में आंधी और बारिश देखने को मिली थी।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, अक्टूबर में पिछले 10 साल के मौसम के आंकड़ों में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी दिन में धूप और रात में ठंडक के साथ बारिश का दौर बना हुआ है।

इस मानसूनी सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से करीब 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से कम रहा। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

इसके अलावा 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में इस साल कुल बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम रही है।

प्रदेश की सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है।

मौसम विभाग के मुताबिक, जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार आया, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक की स्थिति बनी।

जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। इसी वजह से पूरे सीजन में प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।

अब अक्टूबर के आखिरी दिनों में सक्रिय हो रहे नए मौसमी सिस्टम से एक बार फिर बारिश की संभावना बन रही है।

Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।