बदलते मौसम और प्रदूषण, मौसम ब्रेकिंग (गुरुग्राम): सुबह की ठंडी हवा, दिन में तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में घुलता प्रदूषण बच्चों की सेहत के लिए चुनौती बनने लगा है। मौसम में बदलाव के साथ हवा में मौजूद बारीक धूल और जहरीले कण बच्चों के श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे खांसी, जुकाम, गले में खराश, आंखों में जलन, एलर्जी और सांस लेने में परेशानी का खतरा बढ़ गया है।
शहर में दीवाली नजदीक आने के साथ चिंता और बढ़ गई है जहां पटाखों के धुएं के अलावा वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों की धूल और धीमी हवाओं के कारण प्रदूषक वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। ग्रैप लागू होने के बावजूद यदि हवा की गुणवत्ता बिगड़ती है तो बच्चों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
सेक्टर-10 स्थित जिला नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है जहां अक्तूबर के पहले सप्ताह में प्रतिदिन करीब 200 बच्चे आ रहे थे और अब यह आंकड़ा 250 से 270 तक पहुंच गया है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील ने बताया कि प्रदूषण के सूक्ष्म कण फेफड़ों तक पहुंचकर लगातार खांसी, गले में खराश, छींक और दमा से पीड़ित बच्चों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
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डॉक्टरों का कहना है कि दीवाली के आसपास पटाखों और कम हवा की गति से प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका है, इसलिए अभिभावकों को बच्चों की बाहरी गतिविधियों पर ध्यान देना होगा। बच्चों को लगातार खांसी, घरघराहट या सांस लेने में परेशानी होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं देने से बचना चाहिए।
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