बदलते मौसम और प्रदूषण, मौसम ब्रेकिंग (गुरुग्राम): सुबह की ठंडी हवा, दिन में तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में घुलता प्रदूषण बच्चों की सेहत के लिए चुनौती बनने लगा है। मौसम में बदलाव के साथ हवा में मौजूद बारीक धूल और जहरीले कण बच्चों के श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
शहर में दीवाली नजदीक आने के साथ चिंता और बढ़ गई है जहां पटाखों और वाहनों के धुएं के कारण प्रदूषक वातावरण में बने हुए हैं। सेक्टर-10 स्थित जिला नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में आने वाले बच्चों की संख्या 250 से 270 तक पहुंच गई है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील ने बताया कि प्रदूषण के सूक्ष्म कण फेफड़ों तक पहुंचकर बच्चों में खांसी, गले में खराश और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज की समस्या पैदा कर रहे हैं। दमा से पीड़ित बच्चों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है।
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डॉक्टरों की सलाह है कि अभिभावकों को बच्चों की बाहरी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए और हवा खराब होने पर खुले में खेलने से बचना चाहिए। किसी भी गंभीर लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें।
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