कटक धान बाली सुंडी छिड़काव सलाह, Mausam Breaking (ओडिशा के कटक): ओडिशा के कटक जिले में धान की फसल में दाना भरने से शुरुआती पकने की अवस्था के बीच बाली की सुंडी (इयरहेड कैटरपिलर) का प्रकोप देखा जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीकेएमएस) के तहत काम करने वाली कटक की कृषि विज्ञान केंद्र इकाई ने शुक्रवार को जारी बुलेटिन संख्या 657 में किसानों को इस कीट से बचाव के उपाय बताए हैं।
यह बुलेटिन 30 अक्टूबर से 3 नवंबर तक के लिए वैध है।
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के तहत देश के अलग-अलग जिलों के लिए हर पांच दिन में नया मौसम व कृषि सलाह बुलेटिन जारी होता है, जिससे किसानों को मौसम के हिसाब से छिड़काव, सिंचाई और कटाई का सही समय तय करने में मदद मिलती है। यह सुंडी आमतौर पर धान की बाली में दाना भरने के समय ही हमला करती है और दाने को अंदर से खाकर खोखला कर देती है, जिससे उपज सीधे प्रभावित होती है।
बुलेटिन के मुताबिक किसान बारिश पूरी तरह थमने के बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में 400 मिलीलीटर लैम्डा-साइहैलोथ्रिन घोलकर छिड़काव कर सकते हैं। बारिश में भीगी फसल पर छिड़काव का असर कम हो जाता है, इसलिए मौसम साफ होने का इंतजार करना जरूरी बताया गया है।
बुलेटिन में यह भी सलाह दी गई है कि बारिश से भीगे हुए कटे धान को पहले 12 प्रतिशत नमी तक सुखा लिया जाए, और अगर भंडारण में कीट लगने का खतरा हो तो प्रति टन अनाज में एल्युमीनियम फॉस्फाइड की 3 टिकिया से धूमन (फ्यूमिगेशन) किया जा सकता है।
इसी बुलेटिन में कटक जिले की कुछ और फसलों के लिए भी सलाह दी गई है। धान में दाना बदरंग होने की समस्या पर 10 लीटर पानी में स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1.5 ग्राम और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 25 ग्राम मिलाकर छिड़काव करने को कहा गया है।
मूंगफली में तना सड़न रोग के लिए हेक्साकोनाज़ोल 5 प्रतिशत घोल 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से, और दलहन में मुरझाने की समस्या पर वैलिडामाइसिन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। मिर्च और बैंगन में फल सड़न के लिए कार्बेन्डाज़िम 50 प्रतिशत डब्लूपी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करने को कहा गया है, जबकि केले में पनामा विल्ट रोग से बचाव के लिए कार्बेन्डाज़िम 0.2 प्रतिशत घोल से जड़ के पास मिट्टी में ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है।
ककड़ी वर्ग की सब्जियों में डाउनी मिल्ड्यू रोग के लिए बुलेटिन में दो दवाओं को बारी-बारी से इस्तेमाल करने को कहा गया है: मेटालैक्सिल+मैंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी, और एजोक्सीस्ट्रोबिन+टेबुकोनाज़ोल 0.6 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी, दोनों का छिड़काव 10 दिन के अंतराल पर करना है। पपीते में तना गलन रोग होने पर तने के पास मिट्टी में मेटालैक्सिल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से ड्रेंचिंग करने की सलाह है।
सब्जियों के लिए 2 प्रतिशत डीएपी और 1 प्रतिशत म्यूरेट ऑफ पोटाश के छिड़काव तथा केला, काजू व नींबू प्रजाति की फसलों के लिए 1 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट या 2 प्रतिशत यूरिया के पत्तियों पर छिड़काव की पोषण सलाह भी बुलेटिन में शामिल है।
बुलेटिन भारतीय राष्ट्रीय धान शोध संस्थान (ICAR-NRRI) के अंतर्गत आने वाली कटक कृषि विज्ञान केंद्र की जिला कृषि मौसम इकाई ने तैयार किया है, जिसके नोडल अधिकारी डॉ. रंजन कुमार मोहंता हैं।
किसानों को सलाह दी गई है कि किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले उसके लेबल पर दी गई मात्रा की एक बार पुष्टि कर लें।











