गुजरात अरंडी फसल सफेद मक्खी सेमीलूपर कृषि मौसम बचाव उपाय, Mausam Breaking (गुजरात): गुजरात के बनासकांठा, अरवल्ली और गांधीनगर जिलों में अरंडी की फसल फूल और फली बनने की अवस्था में है, और इस समय सफेद मक्खी, सेमीलूपर व रोमदार सुंडी (हेयरी कैटरपिलर) का प्रकोप बढ़ने का खतरा है। भारतीय मौसम विभाग की कृषि मौसम सेवा इकाई दांतीवाड़ा ने बुधवार को जारी बुलेटिन संख्या 84/2026 में किसानों को बचाव के उपाय सुझाए हैं।
गुजरात देश में अरंडी उत्पादन में सबसे आगे रहने वाला राज्य है, और उत्तर गुजरात का यह पूरा इलाका अरंडी की खेती के लिए जाना जाता है। अरंडी के तेल का इस्तेमाल दवा, रंग-रोगन और औद्योगिक रसायन उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए फूल-फली बनने की इस नाजुक अवस्था में कीट प्रकोप से बचाव खासतौर पर जरूरी माना जाता है।
बुलेटिन में सलाह दी गई है कि सफेद मक्खी नियंत्रण के लिए किसान पहले नीम बीज का घोल 500 मिलीलीटर, नीम बीज तेल 50 मिलीलीटर या नीम तेल 40 मिलीलीटर प्रति 10 लीटर पानी के हिसाब से इस्तेमाल करें। ज्यादा प्रकोप होने पर इसके साथ एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत एसपी 5 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है।
सेमीलूपर और रोमदार सुंडी के लिए मैलाथियान 50 ईसी 60 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी, या इमामेक्टिन बेंजोएट 5 डब्लूजी 7.5 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। फसल की पानी की जरूरत के हिसाब से सिंचाई जारी रखने को भी कहा गया है।
यह एडवाइजरी दांतीवाड़ा कृषि मौसम इकाई के दायरे में आने वाले अरवल्ली, बनासकांठा और गांधीनगर के उन खेतों के लिए है, जहां अरंडी अभी फूल और फली बनने की अवस्था में है।
इसी बुलेटिन में दाहोद और आसपास के इलाकों के लिए सेमीलूपर और स्पोडोप्टेरा (तंबाकू की इल्ली) से बचाव हेतु अलग सलाह दी गई है। किसानों को पहले प्रति हेक्टेयर एक लाइट ट्रैप लगाने को कहा गया है, जिससे कीट पतंगों की संख्या पर निगरानी रखी जा सके।
भारी प्रकोप की स्थिति में साफ मौसम में क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी 20 मिलीलीटर, क्विनालफॉस 25 ईसी 20 मिलीलीटर, या इमामेक्टिन बेंजोएट 5 डब्लूजी 4 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। बुलेटिन में यह भी कहा गया है कि बुवाई के 60 दिन तक खेत को खरपतवार मुक्त रखा जाए और दो बार निराई-गुड़ाई के साथ 40 से 50 दिन की अवस्था पर प्रति हेक्टेयर 40 किलो नाइट्रोजन खाद दी जाए।
बुलेटिन में साफ कहा गया है कि छिड़काव सिर्फ साफ और शांत मौसम में ही किया जाए, क्योंकि तेज हवा या बारिश की संभावना में छिड़काव का असर घट जाता है और दवा बर्बाद होती है। किसानों को पहले कम नुकसानदेह नीम आधारित उपाय अपनाने और रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल सिर्फ प्रकोप ज्यादा बढ़ने पर ही करने की सलाह दी गई है, ताकि खेत में फायदेमंद कीट-पतंगों को नुकसान न पहुंचे और दवा पर होने वाला खर्च भी काबू में रहे।
मौसम विभाग की यह एडवाइजरी हर कुछ दिन में अपडेट होती है, जिससे किसानों को फसल की अवस्था और मौसम के हिसाब से समय पर जानकारी मिलती रहती है। किसानों को सलाह दी गई है कि खेत का नियमित निरीक्षण करें और कीट की संख्या बढ़ने के शुरुआती संकेत मिलते ही सलाह में बताए गए कदम उठाएं, ताकि फूल और फली बनने की इस अहम अवस्था में उपज को नुकसान से बचाया जा सके।
प्रभावित इलाकों के किसानों को नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या ग्राम सेवक से भी संपर्क करने को कहा गया है, ताकि किसी भी भ्रम की स्थिति में सही सलाह मिल सके।











