Arnab Cyclone, मौसम ब्रेकिंग (नई दिल्ली): बंगाल की खाड़ी में बने ताजे चक्रवात अर्नब की चर्चा तेज है। मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि यह चक्रवात पूरे उफान पर है और 28 अक्तूबर यानी कल सुबह तक ऑडिशा और आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा।
इसकी रफ्तार 140 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। राज्य सरकारों ने तटीय इलाकों के स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए हैं और सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
सूचना यह भी आ रही है कि कुछ रेलगाड़ियों का संचालन भी रोका गया है। कई राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि इस चक्रवाती तूफान के असर पर सरकारों की गहरी नजर है।
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भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी है और पश्चिम में अरब सागर है, जो दोनों हिंद महासागर का हिस्सा हैं। फिर भी बंगाल की खाड़ी में आम तौर पर अरब सागर से अधिक चक्रवात बनते हैं।
चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का गर्म होना जरूरी है जिससे हवा में नमी जाती है। यह नम हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है और बादल बनाती है, जिससे निकलने वाली ऊर्जा चक्रवात को ताकत देती है।
बंगाल की खाड़ी का पानी अधिक गर्म रहता है और मानसून से पहले व बाद के महीनों में तापमान अनुकूल हो जाता है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और इरावदी जैसी बड़ी नदियां यहां मीठा पानी लाती हैं जो खारे पानी से हल्का होता है।
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सतह पर मीठे पानी की परत बनने से समुद्र का पानी आसानी से नीचे की ठंडी परतों के साथ नहीं मिलता। इससे सतह का गर्म पानी अधिक समय तक बना रहता है और चक्रवात को लगातार ऊर्जा मिलती है।
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बंगाल की खाड़ी के आसपास हवा में नमी अक्सर अधिक रहती है और मानसूनी हवाएं बादलों के बनने में मदद करती हैं। पृथ्वी के घूमने से हवा में पैदा होने वाला घुमाव कम दबाव के क्षेत्र को मजबूत करता है।
बंगाल की खाड़ी उत्तर की ओर संकरी होती जाती है और इसके किनारे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। खाड़ी के किनारों पर उथले समुद्र और तटीय मैदान हैं, जिससे समुद्री लहरें तट पर पहुंचकर बाढ़ और नुकसान बढ़ाती हैं।
अरब सागर में भी चक्रवात बनते हैं लेकिन उनकी संख्या परंपरागत रूप से कम रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वहां ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवाएं चक्रवात के ढांचे को बिखेर देती हैं।
अरब सागर के कुछ हिस्सों में आने वाली शुष्क हवा तूफान में नमी कम कर देती है। सूखी हवा का प्रवेश चक्रवात की ताकत को घटा देता है और विकास में बाधा डालता है।
बंगाल की खाड़ी में अधिक चक्रवात बनने का पुराना रुझान है, लेकिन अरब सागर में भी हाल के दशकों में तीव्र चक्रवात देखे गए हैं। मौसमी और जलवायु स्थितियां बदलकर नए परिणाम तय कर सकती हैं।









