पलामू में मडुआ की खेती से बदल रही तस्वीर, 400 से अधिक महिलाएं जुड़ीं

मडुआ की खेती: जिला पलामू के इलाके में महिलाएं सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण बनती जा रही हैं और वे पलामू में बदलाव लाने वाली शक्ति के रूप में उभरी हैं। पलामू के इलाके में पहली बार महिलाएं मडुवा की खेती से सीधे तौर पर जुड़ी हैं तथा 400 से अधिक महिलाएं मडुआ की खेती कर रही हैं। मनातू में.

प्रतीकात्मक तस्वीर: मडुआ की खेती
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: Ranjeet Chauhan / Pexels

मडुआ की खेती , मौसम ब्रेकिंग (पलामू): जिला पलामू के इलाके में महिलाएं सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण बनती जा रही हैं और वे पलामू में बदलाव लाने वाली शक्ति के रूप में उभरी हैं। पलामू के इलाके में पहली बार महिलाएं मडुवा की खेती से सीधे तौर पर जुड़ी हैं तथा 400 से अधिक महिलाएं मडुआ की खेती कर रही हैं।

मनातू में 200 से अधिक महिलाएं मडुआ की खेती से जुड़ी हैं क्योंकि सरकार मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में पलामू के विभिन्न इलाकों में मनातू, सदर, पाटन समेत कई प्रखंडों में महिलाएं मडुआ की खेती कर रही हैं।

पलामू के विभिन्न इलाकों में 140 से अधिक एकड़ में मडुआ की खेती हुई है और मनातू में अकेले 200 से अधिक महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ी हैं। पलामू के मनातू इलाके की पहचान कभी अफीम की खेती के रूप में होती थी और यह नक्सल प्रभावित भी रहा है।

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जिस मौसम में इलाके में अफीम की खेती होती थी उस मौसम में 70 से अधिक एकड़ में मडुआ की खेती हो रही है तथा महिलाएं मनातू की पहचान के बदलाव में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से बीज उपलब्ध कराया गया है।

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले वर्ष तक पलामू में मडुआ का प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाए ताकि आटा एवं अन्य चीजों का उत्पादन शुरू हो सके। पलामू का इलाका अकाल और सुखाड़ के लिए चर्चित रहा है और प्रत्येक दूसरे वर्ष बारिश को लेकर समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।