बंगाल की खाड़ी चक्रवात और El Nino संबंध, Mausam Breaking (आंध्र प्रदेश तट): एक हफ्ते के भीतर बंगाल की खाड़ी में दो चक्रवाती तूफानों की सक्रियता ने सवाल खड़ा किया है कि क्या इसके पीछे El Nino है। 28 अक्टूबर को चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी, और मंगलवार 3 नवंबर की सुबह गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु ने दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, चक्रवात बनने और उनकी ताकत बढ़ने में समुद्र का तापमान, उसमें जमा ऊष्मा, हवा की नमी और वायुमंडल की हवाओं की स्थिति जैसे कई कारक होते हैं। El Nino भी इनमें से एक कारक है, लेकिन इसका असर सीधा नहीं है।
कुछ शोध बताते हैं कि El Nino के दौरान बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की संख्या घट सकती है, जबकि उनके बनने की जगह और आगे बढ़ने का रास्ता बदल सकता है।
उत्तर हिंद महासागर में चक्रवातों का प्रमुख समय मानसून से पहले अप्रैल-मई और मानसून के बाद अक्टूबर-दिसंबर माना जाता है। इसलिए अक्टूबर और नवंबर में एक के बाद एक चक्रवाती सिस्टम बनना अपने आप में असामान्य नहीं है।
भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मुरासु 3 नवंबर की सुबह 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंकों के साथ दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। इससे पहले अर्नब भी आंध्र प्रदेश में असर दिखा चुका था।
चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का तापमान सामान्यतः 26.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होना अनुकूल माना जाता है। गर्म समुद्र से वाष्पीकरण बढ़ता है और नमी हवा में पहुंचती है।
बंगाल की खाड़ी में नदियों से आने वाला मीठा पानी समुद्र की ऊपरी परत को हल्का बनाकर सतह पर गर्म पानी बनाए रख सकता है। IMD के अनुसार, मानसून के बाद बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की घटनाएं प्री-मानसून की तुलना में ज्यादा होती हैं।
El Nino प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों पर इसका प्रभाव देखा गया है, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि El Nino चक्रवातों को हमेशा अधिक ताकतवर बनाता है।
मार्च 2026 में प्रकाशित एक शोध में 1995 से 2019 के मानसून बाद के चक्रवातों का अध्ययन किया गया, जिसके अनुसार La Nina के वर्षों में चक्रवात बनने की परिस्थितियां El Nino की तुलना में अधिक अनुकूल रहीं। वहीं IMD के जर्नल में प्रकाशित एक पुराने अध्ययन के अनुसार El Nino वाले वर्षों में बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातों के दक्षिण आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तट की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति देखी गई थी।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती सिस्टम आसपास की हवा और नमी के प्रवाह को प्रभावित करते हैं, जिससे दक्षिण और मध्य भारत में बारिश, तेज हवाएं और तापमान में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि उत्तर भारत में ठंड की शुरुआत केवल चक्रवातों पर निर्भर नहीं करती; पश्चिमी विक्षोभ, हिमालय से आने वाली ठंडी हवाएं और स्थानीय मौसम परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मुरासु के कारण उत्तर भारत में ठंड दिसंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते तक ही शुरू होगी। चक्रवात के कमजोर पड़ने और उसके बाद बनने वाली मौसम प्रणालियों के आधार पर ही ठंड की स्थिति साफ होगी।











