Kedartal Avalanche, Mausam Breaking (उत्तरकाशी, उत्तराखंड): उत्तराखंड के उत्तरकाशी में केदारताल ट्रेक पर गया एक दल भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इस हादसे में लापता हुए 8 लोगों में से अब तक 6 के शव बरामद किए जा चुके हैं।
बुधवार, 4 नवंबर को सर्च ऑपरेशन के दौरान मिले शवों में लखनऊ की दो सगी बहनें वर्तिका वर्मा (28) और दीपिका वर्मा (29) भी शामिल हैं। दोनों को पहाड़ों पर घूमने और ट्रेकिंग का बेहद शौक था।
वे भारत और नेपाल के कई मुश्किल ट्रेक पूरे कर चुकी थीं। करीब 2 महीने पहले ही वे फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौटी थीं।
परिजनों का आरोप है कि खराब मौसम की जानकारी के बावजूद ट्रेकिंग कराई गई और हादसे के बाद उन्हें समय पर सूचना तक नहीं दी गई। यह आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लखनऊ के गायत्रीपुरम की रहने वाली वर्तिका वर्मा फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर थीं, जबकि दीपिका वर्मा एक निजी कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर थीं। परिवार के मुताबिक दोनों बहनें अपने भाई अतुल और दोस्तों के साथ उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र में केदारकांठा ट्रेक भी पूरा कर चुकी थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तिका और दीपिका 27 अक्टूबर को सात अन्य ट्रेकर्स और पांच सपोर्ट स्टाफ सदस्यों के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुई थीं। पूरे दल में 12 लोग शामिल थे और तीन दिन के ट्रेक के बाद 29 अक्टूबर को वापसी तय थी।
इसी दौरान भारी बर्फबारी और कई जगह हिमस्खलन से रास्ता बाधित हो गया और आठ सदस्य बीच रास्ते में फंस गए।
30 अक्टूबर को दल के कुछ सदस्यों ने ट्रेकिंग एजेंसी से संपर्क कर कच्ची ढांग के पास फंसे होने की जानकारी दी और मदद मांगी। 31 अक्टूबर को सपोर्ट स्टाफ के चार सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि बाकी आठ लोगों की तलाश जारी रही।
खराब मौसम, ऊंचाई और लगातार बर्फबारी के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए अभियान बेहद कठिन रहा। 3 नवंबर को करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर बचाव दल को टेंट और कुछ सामान मिला, तथा 2 शव बरामद हुए।
4 नवंबर को तलाशी के दौरान तीन और शव मिले और दोपहर के बाद एक और शव बरामद हुआ। इनमें वर्तिका और दीपिका भी शामिल थीं।
दोनों के शव करीब 7 दिन बाद बर्फ से ढके इलाके में मिले।
परिवार को हादसे की खबर सोशल मीडिया पर मिली। इसके बाद भाई अतुल वर्मा अन्य परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे और तलाश में जुट गए।
केदारताल उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री क्षेत्र के पास स्थित प्रसिद्ध हिमालयी झील है। यह ट्रेक चट्टानी रास्ते, खड़ी चढ़ाई, ग्लेशियर और अचानक मौसम बदलने जैसी चुनौतियों के लिए जाना जाता है।
अक्टूबर के आखिरी दिनों में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की आशंका भी रहती है, इसलिए मौसम की स्थिति, प्रशासनिक अनुमति, गाइड व सपोर्ट टीम और आपातकालीन बचाव योजना का ध्यान रखना जरूरी है।














