खेती की लागत , मौसम ब्रेकिंग (राजस्थान): इस सर्वेक्षण के अनुसार कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 12,520 रुपये आंकी गई थी। यह आंकड़े केवल फसल बेचने से होने वाली कमाई नहीं, बल्कि मजदूरी और दूसरे स्रोतों से प्राप्त आय को भी जोड़ते हैं।
इसलिए इसे खेत से होने वाला शुद्ध लाभ समझना सही नहीं होगा। ये आंकड़े वर्ष 2018-19 के हैं, वर्तमान आय का अनुमान नहीं, लेकिन यह जरूर दिखता है कि किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए उनकी पूरी आमदनी और खर्च का हिसाब देखना जरूरी है।
जब बारिश की अनिश्चितता के कारण फसल खराब हो जाती है, तो किसान के सामने अगली फसल की तैयारी का सवाल खड़ा हो जाता है। बीज, खाद, डीजल और मजदूरी के लिए फिर से पैसा चाहिए, जिन परिवारों के पास बचत नहीं होती, उन्हें सहकारियों से कर्ज लेने की मजबूरी हो सकती है।
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कर्ज मिलने से तत्काल जरूरत तो पूरी हो जाती है, लेकिन ब्याज की जिम्मेदारी अगली फसल के साथ जुड़ जाती है। यदि अगली फसल भी अच्छी नहीं हुई या मंडे में उचित कीमत न मिले, तो पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेने की नौबत आ सकती है।
एनएसओ के इस सर्वेक्षण के मुताबिक, देश के 50.2 प्रतिशत कृषक परिवार कर्जदार थे और प्रति कर्जदार कृषक परिवार का औसत बकाया कर्ज 74,121 रुपये था। यह आंकड़े किसानों के कर्ज में डूबने की भयवह सच्चाई को दर्शाते हैं, फसल तैयार होने के बाद भी किसान की चिंता खत्म नहीं होती।
उसे मंडी में अपनी उपज का ऐसा भाव चाहिए, जिससे बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, परिवहन और दूसरे खर्च निकालने के बाद परिवार की जरूरतों के लिए कुछ पैसे बच सकें। यदि बाजार में कीमत कम मिलती है, तो अच्छी फसल होने के बावजूद किसान को अपेक्षित आमदनी नहीं मिलती।
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ऐसे में न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि पात्र किसानों की उपज की खरीद प्रभावी ढंग से हो और उन्हें खरीद केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी न हो।
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खेत की आर्थिक व्यवस्था पर चर्चा करते समय महिलाओं के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ग्रामीण परिवारों में महिलाएं बुवाई, निराई, कटाई, पशुओं की देखभाल, चारा जुटाने और घरेलू जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कई बार खेत में उनका काम के घंटे लंबे होते हैं, लेकिन आर्थिक फैसलों, प्रशिक्षण, ऋण और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच सीमित रहती है। यदि खेत की लागत और परिवार की आय का सही आकलन करना है, तो महिलाओं के श्रम को भी काम के वास्तविक हिस्से के रूप में स्वीकार करना होगा।
महिला किसानों की भूमि और खेत से जुड़े दस्तावेजों, कृषि प्रशिक्षण, संस्थागत ऋण, उपकरणों और बाजार की जानकारी तक सहज पहुंच देना जरूरी है। इससे न केवल उनके काम को मान्यता मिलेगी, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े फैसलों में भी उनकी भागीदारी बढ़ेगी।









