कश्मीर की गुरेज घाटी में फिर लौटेंगी पारंपरिक फसलें

गुरेज घाटी पारंपरिक खेती: कृषि वैज्ञानिक कश्मीर की गुरेज घाटी में पारंपरिक खेती, खासकर मोटे अनाज को बढ़ावा दे रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती और बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है। देश में जब मोटे अनाज यानी मिलेट्स को पोषण सुरक्षा और टिकाऊ खेती के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। तब कश्मीर.

प्रतीकात्मक तस्वीर: गुरेज घाटी पारंपरिक खेती
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: Aadil Mehraj / Pexels

गुरेज घाटी पारंपरिक खेती, मौसम ब्रेकिंग (श्रीनगर): कृषि वैज्ञानिक कश्मीर की गुरेज घाटी में पारंपरिक खेती, खासकर मोटे अनाज को बढ़ावा दे रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती और बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है।

देश में जब मोटे अनाज यानी मिलेट्स को पोषण सुरक्षा और टिकाऊ खेती के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। तब कश्मीर संभाग की इस दुर्गम घाटी से नई पहल सामने आई है ताकि स्थानीय कृषि को मजबूत किया जा सके।

यहां पारंपरिक फसलों की खेती को दोबारा मजबूत बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने पूरी तैयारी कर ली है। इस पूरी योजना का मुख्य मकसद खेतों में केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं है।

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पहाड़ों के किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। साथ ही स्थानीय कृषि को बदलते मौसम के अनुरूप अधिक टिकाऊ बनाया जा रहा है।

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Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।