लखिसराय मौसम और कृषि सलाह, मौसम ब्रेकिंग (कजरा): बदलते जलवायु और मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों को खेती-किसानी के तौर-तरीकों में बदलाव करने की जरूरत है। अनियमित वर्षा, बाढ़, सुखाड़ और तापमान में उतार-चढ़ाव का सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ रहा है।
ऐसे में किसानों को मौसम के अनुकूल खेती की तकनीक अपनाने के साथ रबी फसलों की बुआई निर्धारित समय पर पूरी करनी चाहिए। यह सलाह किसान सलाहकार अनिल कुमार सिंह ने किसानों को दी।
उन्होंने कहा कि गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुआई करना बेहद जरूरी है। सामान्यतः गेहूं की बुआई 15 नवंबर से पांच दिसंबर तक की जाती है, लेकिन बदलते मौसम को देखते हुए 15 नवंबर तक बुआई पूरी कर लेना किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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समय पर बुआई करने से फसल में फूल आने और दाना पकने के दौरान अधिक तापमान के प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकता है।
किसान सलाहकार ने बताया कि गेहूं की देर से बुआई होने पर फसल को दाना बनने और पकने के समय अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। पछुआ हवा और बढ़ते तापमान के कारण दाने के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिससे उपज में कमी आने की आशंका रहती है।
वहीं, देर से तैयार होने वाली फसल की कटाई अप्रैल तक खिंच सकती है, जिससे बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का खतरा रहता है।
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अनिल कुमार सिंह ने रबी मक्का की खेती करने वाले किसानों को भी समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बेहतर पैदावार के लिए 10 नवंबर से 30 नवंबर के बीच मक्का की बुआई करना उपयुक्त माना जाता है।
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किसानों को अक्टूबर में जल्दबाजी में बुआई करने से बचना चाहिए और स्थानीय मौसम तथा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खेत तैयार करना चाहिए।
बदलते मौसम में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाना जरूरी है। किसानों को फसल चक्र का पालन करना चाहिए तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मौसम संबंधी पूर्वानुमान पर ध्यान दें और कृषि विभाग के सुझावों के अनुसार खेती करें।









