चक्रवात अर्नब, मौसम ब्रेकिंग (भुवनेश्वर): ओडिशा में चक्रवात अर्नब को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। कैबिनेट सचिव ने आज ओडिशा सरकार की साइक्लोन की तैयारियों की समीक्षा की।
कैबिनेट सचिव को चक्रवात अर्नब को लेकर ओडिशा की तैयारियों, जरूरतों और उपायों के बारे में जानकारी दी गई। राज्य की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने केंद्रीय सचिव को राज्य की तैयारियों के बारे में बताया है।
इसी तरह सरकार उन 3,000 गर्भवती महिलाओं पर नजर रख रही है जो बच्चे को जन्म देने वाली हैं। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में मुख्य सचिव, विकास आयुक्त देव रंजन कुमार सिंह और एसआरसी राजेश प्रभाकर पाटिल शामिल हुए।
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बैठक के बाद मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि कैबिनेट सचिव ने साइक्लोन के लिए ओडिशा की तैयारियों की समीक्षा की है। उन्होंने आगे बताया कि ओडिशा में चक्रवात अर्नब को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने बताया कि दक्षिण ओडिशा इससे प्रभावित होगा। इसलिए चक्रवात और उसके बाद की स्थिति से निपटने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।
बिजली और जल संसाधन विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आगे बताया कि अगर छत्तीसगढ़ में ज्यादा बारिश होती है तो ऊपरी इलाकों से ओडिशा में और पानी आ सकता है।
भारी बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए एक टीम बनाई गई है।
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अगर छत्तीसगढ़ पानी छोड़ता है तो हमें सूचित कर दिया जाएगा। तटरक्षक बल सभी मछुआरों पर नजर बनाए हुए हैं।
साथ ही सभी जिला कलेक्टर सतर्क हैं।
उन्होंने कहा कि चक्रवात के दौरान 3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव हो सकता है। इसलिए उन्हें सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र की ओर से हर जरूरी मदद दी जाएगी।
केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने कहा कि अभी तक कोई मदद नहीं मांगी गई है। वहीं विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने कहा कि चक्रवात की संभावना को देखते हुए 3,000 से अधिक गर्भवती महिलाएं निगरानी में हैं।
चक्रवात अर्नब को लेकर झुग्गी-बस्तियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 135 चक्रवात आश्रय स्थल और 1600 अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं।
5 अधिकारी और 8 मंत्री भी जिले में जा रहे हैं। अन्य राज्यों के साथ समन्वय बिठाया गया है।
जिला कलेक्टर उन लोगों की पहचान कर रहे हैं जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाना है।
अगर बारिश और बढ़ती है, तो लोगों को वहां से निकाल लिया जाएगा। हमारे पास 48 घंटे का समय है।
फिलहाल जिले में एनडीआरएफ की 8 टीमें, ओडीआरएएफ की 40 टीमें और फायर टीमें तैनात हैं।
गंजम जिले में एक अतिरिक्त टीम मौजूद है। तटीय जिलों के लिए और भी टीमें तैनात की गई हैं।
जरूरत पड़ने पर न केवल राज्य के भीतर, बल्कि अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा।
भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और थल सेना के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। बचाव कार्यों के लिए जरूरी वाहन और आश्रय स्थल तैयार रखे गए हैं।
हालांकि चक्रवात का रास्ता और उसकी तीव्रता स्पष्ट होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी और उसी के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। एसआरसी ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।









