चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना

चक्रवाती तूफान: बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही चक्रवाती स्थिति के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 25 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है, जिसे लेकर कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: चक्रवाती तूफान
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: Péter Kövesi / Pexels

चक्रवाती तूफान, मौसम ब्रेकिंग (छत्तीसगढ़): भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही चक्रवाती स्थिति के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 25 अक्टूबर से वर्षा की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है।

इसे देखते हुए किसानों को फसलों की सुरक्षा, खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी और पशुओं को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।

इन जिलों में वर्षा की संभावना 25 अक्टूबर को बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। बालोद, धमतरी, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, दुर्ग, राजनांदगांव सहित कई जिलों में भी भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है।

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26 अक्टूबर को दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, कांकेर, कोंडागांव, बिलासपुर, बेमेतरा, बस्तर सहित विभिन्न जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है।

27 अक्टूबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानों पर वर्षा हो सकती है। वहीं, 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने तथा कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

किसान अभी कटाई और बुवाई में सावधानी बरतें और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें।

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पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई फिलहाल दो से चार दिन तक टालें। जिन किसानों ने कटाई कर ली है, वे फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित एवं ढके हुए स्थान पर रखें।

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खेतों में जलभराव से बचने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करें।

खेतों की नियमित निगरानी करें और कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही उचित कीटनाशक या कवकनाशक का छिड़काव करें। उतेरा फसल के रूप में तिवरा और अलसी की बुवाई कुछ दिनों के लिए टालने तथा रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।

सब्जियों, फलों और पशुओं की सुरक्षा जरूरी है क्योंकि तेज हवा और वर्षा की आशंका को देखते हुए लता वाली सब्जियों को सहारा देना आवश्यक है। जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस से सहारा देकर गिरने से बचाएं।

खेतों और बगीचों में जल निकासी सुनिश्चित करें।

ओलावृष्टि की आशंका वाले क्षेत्रों में उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का उपयोग करें। पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें, उनके लिए चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था करें तथा वज्रपात के दौरान पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें।

Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।