राजस्थान में कम बारिश वाले किसानों के लिए बाजरा-ज्वार बेहतर विकल्प, कृषि विभाग ने मिलेट्स की खेती पर दिया जोर

राजस्थान बाजरा ज्वार कम बारिश किसान: राजस्थान में राजस्थान बाजरा ज्वार कम बारिश किसान: कम वर्षा और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में बाजरा और ज्वार जैसी मोटे अनाज की फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। कृषि विभाग बूंदी ने ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत किसानों को मिलेट्स की खेती के फायदे, पोषण महत्व और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया है।

राजस्थान बाजरा ज्वार कम बारिश किसान, Mausam Breaking (राजस्थान): कम वर्षा और सीमित सिंचाई संसाधनों वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए बाजरा और ज्वार जैसी मोटे अनाज की फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। इन फसलों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग बूंदी द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत विभाग पारंपरिक फसलों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित कर रहा है। सप्ताह के अंतर्गत बुधवार को निर्धारित ‘सतत खाद्य प्रणालियां अपनाएं’ गतिविधि में श्री अन्न एवं मोटे अनाज के संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया।

इस दौरान किसानों को मिलेट्स की खेती के महत्व, उपयोगिता और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देना, कृषि जैव विविधता का संरक्षण करना और किसानों को जलवायु अनुकूल खेती के विकल्पों से जोड़ना है।

कृषि विभाग के अनुसार, बाजरा और ज्वार की फसलें राजस्थान की जलवायु के अनुकूल हैं। इन्हें दूसरी कई फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है और ये कम उर्वरता वाली भूमि में भी उगाई जा सकती हैं।

इनमें कीट और बीमारियों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है।

श्री अन्न और मोटे अनाज पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने से स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा, फसल विविधीकरण से टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।

बाजरा और ज्वार का चारा पशुपालन के लिए भी उपयोगी होता है, जिससे खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। इन फसलों की कम पानी की जरूरत से जल संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिलती है।

ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत जिले के कृषि पर्यवेक्षक मुख्यालयों और ब्लॉक मुख्यालयों में मिलेट्स को लेकर कृषक गोष्ठियों का आयोजन किया गया, जिनमें किसानों को बाजरा, ज्वार सहित अन्य मोटे अनाज की खेती के फायदे और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी भूमि, स्थानीय जलवायु और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों के अनुसार बाजरा, ज्वार सहित अन्य मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दें। किसान उपयुक्त किस्मों, बुवाई के समय और फसल प्रबंधन की जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षकों और कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

Neha Singh

Neha Singh, Mausam Breaking में Senior Copy & SEO Editor हैं। वे articles की भाषा, headline clarity, search intent, internal linking और overall readability पर काम करती हैं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी search engines के लिए technically clear होने के साथ-साथ पाठकों के लिए भी उपयोगी और स्वाभाविक बनी रहे।

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