भागलपुर में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर, काले बादलों से ढका आसमान; बूंदाबांदी से गिरा तापमान

भागलपुर मौसम: आसमान में घने काले बादल, सूरज की रोशनी पर छायी धुंध और दोपहर बाद हुई बूंदाबांदी ने भागलपुर के मौसम का मिजाज बदल दिया है। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से जिले में मौसम में बदलाव देखने को मिला और मंगलवार सुबह से ही आसमान में बादल छाये रहे। दोपहर करीब दो बजे के बाद कुछ देर तक.

प्रतीकात्मक तस्वीर: भागलपुर मौसम
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: harish bisu / Pexels

भागलपुर मौसम, मौसम ब्रेकिंग (भागलपुर): आसमान में घने काले बादल, सूरज की रोशनी पर छायी धुंध और दोपहर बाद हुई बूंदाबांदी ने भागलपुर के मौसम का मिजाज बदल दिया है। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से जिले में मौसम में बदलाव देखने को मिला और मंगलवार सुबह से ही आसमान में बादल छाये रहे।

दोपहर करीब दो बजे के बाद कुछ देर तक बूंदाबांदी हुई, जबकि अधिकतम तापमान में भी एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गयी। मौसम में इस बदलाव के बीच किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि यह समय धान की कटाई और रबी फसलों की बुआई की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने 28 अक्तूबर से 1 नवंबर तक के मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों के लिए कृषि सलाह जारी की है। इसमें संभावित बारिश, तेज हवा और वज्रपात को ध्यान में रखकर फसलों की सुरक्षा तथा खेतों में काम करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है।

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चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से दक्षिण बिहार के जिलों में मध्यम बारिश होने की संभावना है और इस दौरान मेघ गर्जन, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अनुमान जताया गया है। पूर्वानुमान के मुताबिक अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

धान की कटाई के समय बारिश होने से खेतों में पानी जमा होने और कटी फसल के भीगने की आशंका रहती है, जिसे देखते हुए किसानों को खेतों और सब्जियों की फसलों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने को कहा गया है। कटी हुई फसल को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखने की सलाह भी दी गयी है, ताकि संभावित बारिश से नुकसान कम किया जा सके।

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने किसानों को सरसों, धनिया, मटर और पालक की बुआई मौसम साफ रहने पर ही करने की सलाह दी है। मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए बुआई का समय तय करने और खेतों की स्थिति पर ध्यान देने को कहा गया है, जबकि सब्जियों की फसलों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी बताया गया है।

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कृषि वैज्ञानिकों ने धान की फसल में गंधी बग और भूरे तना मधुआ कीट की निगरानी करने को कहा है और किसानों को फसल की नियमित जांच करने की सलाह दी है। कीट नियंत्रण के लिए निर्धारित मात्रा में दवा का इस्तेमाल मौसम साफ रहने पर ही करने को कहा गया है।

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मौसम पूर्वानुमान के साथ पशुपालकों के लिए भी सलाह जारी की गयी है जिसमें दुधारू पशुओं को हरे और सूखे चारे को 50:50 के अनुपात में खिलाने को कहा गया है। इसके अलावा प्रतिदिन 20 से 30 ग्राम खनिज मिश्रण और नमक देने तथा पशुशाला के आसपास मच्छर व मक्खी का प्रकोप रोकने के लिए चूने का छिड़काव करने को कहा गया है।

Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।