उत्तर प्रदेश मौसम कोहरा प्रदूषण बारिश, Mausam Breaking (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बीते 24 घंटों में तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है।
सुबह और शाम के समय ठंड और ठिठुरन बढ़ने लगी है।
मंगलवार सुबह संभल, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर और हापुड़ समेत सात जिलों में कोहरा छाया रहा। कई स्थानों पर दृश्यता कम होने से सड़कों पर आवाजाही प्रभावित नजर आई।
दिल्ली-एनसीआर से सटे नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और बागपत में वायु प्रदूषण चिंता बढ़ा रहा है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंच गया है और धुंध की परत दिखाई दे रही है।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए डीजल से चलने वाले व्यावसायिक वाहनों और इंजनों पर रोक लगाई गई है। होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर महीने में प्रदेश में कुल 32.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि औसत अनुमान 28.2 मिलीमीटर था। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।
अक्टूबर में सबसे ज्यादा बारिश वाले 15 जिलों में गाजियाबाद 1191 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश के साथ पहले स्थान पर रहा। बागपत में सामान्य से 1169 प्रतिशत और नोएडा में 1129 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
मुजफ्फरनगर में 755 प्रतिशत तथा मेरठ में 604 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से उठे नए तूफान का उत्तर प्रदेश पर सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छा सकते हैं।
धूप कमजोर रहने के कारण दिन के तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी और सुबह-शाम ठंड का असर बना रह सकता है।
लखनऊ में मंगलवार को अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। प्रयागराज में दिन में धूप से हल्की गर्माहट रहती है, जबकि रात होते ही कई इलाकों में धुंध छाने लगती है।
वाराणसी में सोमवार सुबह घने कोहरे के कारण हवाई यातायात प्रभावित हुआ। दृश्यता करीब 200 मीटर तक सिमट गई थी और तीन विमानों को उतरने की अनुमति नहीं मिली।
मंगलवार सुबह वाराणसी में मौसम साफ रहा, तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि AQI 141 रहा।
BHU के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, आने वाले एक सप्ताह तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है, हालांकि धूप हल्की रहेगी और बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं।
नवंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को रबी फसलों के प्रबंधन में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पूर्वांचल में गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई के दौरान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है।
निचले खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए नमी का आकलन करने के बाद ही सिंचाई का निर्णय लेने की सलाह दी गई है।
अतिवृष्टि और तूफान से फसलों को हुए नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरकर तत्काल फसल क्षति का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं।












