Aloo Ki Kheti Mein Na Karein Ye 3 Galtiyan, मौसम ब्रेकिंग (चियांकी): आलू की खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का एक बेहतर विकल्प है, लेकिन सही देखभाल न करने और रोगों को नजरअंदाज करने से पैदावार प्रभावित हो सकती है। ठंड के मौसम में बादल छाए रहने और बूंदाबांदी होने पर पछेती झुलसा रोग का खतरा बढ़ जाता है।
पलामू स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने सिंचाई, मिट्टी चढ़ाने और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।
आलू के कंदों के विकास के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी है, लेकिन जलभराव से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
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बारिश या बूंदाबांदी के दौरान खेत में पानी जमा न होने दें और संतुलित सिंचाई अपनाएं ताकि पौधों की बढ़वार अच्छी हो सके। इसके अलावा, फसल की बढ़वार के दौरान कम से कम दो बार पौधों पर मिट्टी चढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
समय पर मिट्टी न चढ़ाने से कंद जमीन से बाहर निकलकर हरे हो सकते हैं, इसलिए पर्याप्त परत होना आवश्यक है। पछेती झुलसा रोग ठंडे और नम मौसम में तेजी से फैलता है, जिसके शुरुआती लक्षणों में पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे दिखते हैं।
लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और कृषि विशेषज्ञ की सलाह से मैंकोजेब जैसे फफूंदनाशकों का उपयोग करें। सही किस्म के चयन और वैज्ञानिक प्रबंधन से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।
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