राजस्थान की 80 तहसीलों में अकाल घोषित, 14 जिलों में फसलें बर्बाद

राजस्थान सूखाग्रस्त घोषित: मानसून की बेरुखी के कारण राजस्थान सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त घोषित किया है। कम बारिश से फसलें बर्बाद होने और पानी का संकट गहराने के बाद यह फैसला लिया गया है जिससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का रास्ता साफ हुआ है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: राजस्थान सूखाग्रस्त घोषित
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: kevin yung / Pexels

राजस्थान सूखाग्रस्त घोषित, मौसम ब्रेकिंग (जयपुर): राजस्थान में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और पानी का संकट गहराने लगा है।

हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त घोषित किया है।

इनमें जोधपुर, जालोर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जैसे जिले शामिल हैं। सरकार के इस फैसले से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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अब इन इलाकों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने और जरूरी राहत उपाय करने का रास्ता साफ हो गया है।

राज्य सरकार ने रविवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में अकाल जैसे हालात बने हुए हैं।

ऐसे में सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सूखाग्रस्त तहसीलों को लेकर यह निर्णय लिया है।

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उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोले जाएंगे और लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, कुल 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

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इनमें जोधपुर जिले की सबसे ज्यादा 12 तहसीलें शामिल हैं। इसके अलावा जालोर और बाड़मेर की 10-10, बालोतरा की 9 और पाली की 8 तहसीलों को इस सूची में रखा गया है।

डूंगरपुर, जैसलमेर और फलोदी की 7-7 तहसीलें भी सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं।

वहीं बांसवाड़ा की 3, ब्यावर की 2, चूरू की 2 और बीकानेर की 2 तहसीलों को भी इसमें शामिल किया गया है। नागौर और सिरोही जिले की एक-एक तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, सूखाग्रस्त घोषित क्षेत्रों में संबंधित कानूनी प्रावधान अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से अगले छह महीने तक प्रभावी रहेंगे।

इससे प्रभावित इलाकों में प्रशासन को राहत और आपदा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह निर्णय केवल बारिश के आंकड़ों के आधार पर नहीं लिया है।

इसके लिए भूजल स्तर में गिरावट, सतही जल की उपलब्धता और फसलों को हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन किया गया।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित तहसीलों को गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पाली जिले में सामान्य से 58 फीसदी और जैसलमेर में 54 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

जालोर में बारिश की कमी 50 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि बांसवाड़ा में सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश हुई। सिरोही में 36 फीसदी, जोधपुर में 27 फीसदी, बालोतरा में 28 फीसदी और डूंगरपुर में 24 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

बारिश की कमी के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रह पाई। इसका सीधा असर फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ा है।

कई क्षेत्रों में फसलें सूखने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू करने का रास्ता खुला है। सरकार ने पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

इसके साथ ही जिला प्रशासन पानी और चारे की उपलब्धता जैसे जरूरी मुद्दों पर कदम उठा सकेगा।

हालांकि, किसानों को किस तरह की राहत मिलेगी, किन गांवों को इसमें शामिल किया जाएगा और सहायता की विस्तृत व्यवस्था क्या होगी, इस बारे में अलग से दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार है। ऐसे में प्रभावित किसानों की नजर अब सरकार के अगले फैसलों पर रहेगी।

किसी इलाके में बारिश की भारी कमी, पानी की अनुपलब्धता और फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने पर उसे सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है। इसके लिए बारिश के आंकड़ों के साथ भूजल स्तर, जल स्रोतों की स्थिति और फसल नुकसान का आकलन किया जाता है।

कृषि विभाग की गिरदावरी और संबंधित वैज्ञानिक आकलन इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।

Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।