मिर्जापुर के 23 गांवों में 16.92 करोड़ की लागत से बारिश का पानी सहेजने की परियोजना शुरू

मिर्जापुर जल संरक्षण परियोजना: मिर्जापुर जल संरक्षण परियोजना, मौसम ब्रेकिंग (मिर्जापुर): उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में बारिश का पानी सहेजने के लिए 16.92 करोड़ रुपये की परियोजना चलाई जा रही है। पटेहरा ब्लॉक के 23 गांवों में जल संचयन, बांध, तालाब और स्वचालित मौसम प्रणाली स्थापित की गई है जिससे किसानों को मौसम पूर्वानुमान और कृषि परामर्श का लाभ मिल रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: मिर्जापुर जल संरक्षण परियोजना
प्रतीकात्मक तस्वीर. Photo: Abhishek Karora / Pexels

मिर्जापुर जल संरक्षण परियोजना, मौसम ब्रेकिंग (मिर्जापुर): मिर्जापुर में बारिश का पानी सहेजकर खेती और पेयजल की जरूरतें पूरी करने के लिए पटेहरा ब्लॉक के परमापुर जलागम क्षेत्र में काम किए जा रहे हैं। यहां जल संरक्षण के लिए दो बांध, 13 तालाब और पांच नाला प्लग तैयार किए गए हैं।

करीब 10 किमी नाले का गहरीकरण और चौड़ीकरण कराया गया है। इन कार्यों से करीब 2.5 लाख घन मीटर वर्षा जल संचयन की क्षमता विकसित हुई है।

शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार सिंह ने परियोजना का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति देखी।

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उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य कृषि विकास योजना के तहत ICRISAT की ओर से संचालित यह परियोजना वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक चलेगी। इसके तहत 7,996 हेक्टेयर क्षेत्र के 23 गांवों में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के कार्य हो रहे हैं।

परियोजना की कुल लागत 16.92 करोड़ रुपए है।

परियोजना के तहत करीब 1,000 एकड़ खेतों में मेड़बंदी की गई है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को खेतों में रोकना और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है।

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कृषि क्षेत्र में करीब 161 एकड़ में मूंगफली, मूंग, तिल और अरहर की प्रदर्शन फसलें लगाई गई हैं। सात हेक्टेयर में आम, अमरूद, नींबू, आंवला, बेल और एप्पल बेर के करीब 12,100 पौधे लगाए गए हैं।

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सीडीओ ने बेलहरा गांव में जल संचयन बांध, पक्के नाला प्लग और स्वचालित मौसम प्रणाली (एडब्ल्यूएस) का निरीक्षण किया। इस प्रणाली से बारिश, तापमान, आर्द्रता और हवा से संबंधित आंकड़े दर्ज किए जाते हैं।

इनके आधार पर किसानों को मोबाइल फोन पर मौसम पूर्वानुमान और कृषि परामर्श दिया जा रहा है, ताकि वे बुवाई और सिंचाई का सही समय तय कर सकें। निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने किसानों से बातचीत कर परियोजना का असर जाना।

किसानों ने बताया कि जल संरक्षण संरचनाओं से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ है। भूजल स्तर बढ़ने से पेयजल की उपलब्धता पर भी सकारात्मक असर पड़ा है।

सीडीओ ने जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

Aditi Chauhan
लेखक परिचय

Aditi Chauhan

Climate & Weather Explainer Writer

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।