राजस्थान में सरसों पर पेन्टेड बग का खतरा, चने में उकठा रोग से बचाव के लिए बीजोपचार की सलाह

राजस्थान सरसों पेन्टेड बग चना उकठा रोग बीजोपचार सलाह: मौसम विभाग के मौसम केंद्र जयपुर के बुलेटिन में सरसों में पेन्टेड बग, आरा मक्खी और हीरक तितली से बचाव के उपाय और चने में उकठा रोग से बचाव के लिए बीजोपचार की सिफारिश की गई है। बुलेटिन 3 नवंबर को जारी हुआ और 7 नवंबर तक वैध है।

राजस्थान सरसों पेन्टेड बग चना उकठा रोग बीजोपचार सलाह, Mausam Breaking (राजस्थान): राजस्थान में सरसों की बुवाई के बाद कीट प्रकोप की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, मौसम केंद्र जयपुर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के तहत जारी बुलेटिन में सरसों के खेतों में पेन्टेड बग, आरा मक्खी और हीरक तितली से बचाव के उपाय बताए गए हैं।

यह बुलेटिन 3 नवंबर को जारी हुआ और 7 नवंबर तक के लिए वैध है।

बुलेटिन के अनुसार सरसों के अंकुरण के 7 से 10 दिन के भीतर ये कीट सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए इस दौरान खेतों पर खास नज़र रखने की सलाह दी गई है।

कृषि वैज्ञानिकों ने इन कीटों से बचाव के लिए तीन विकल्प सुझाए हैं। किसान मैलाथियॉन 5 प्रतिशत चूर्ण की 25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर सुबह या शाम के समय भुरक सकते हैं।

मैलाथियॉन 50 ईसी की 1.25 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। डाईमेथोएट 30 ईसी का इस्तेमाल करने वाले किसान 875 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में कीट नियंत्रण करने से सरसों की फसल का नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है। छिड़काव के समय मौसम साफ हो और हवा तेज़ न चल रही हो, ताकि दवा का असर अच्छी तरह हो सके।

इसी बुलेटिन में चने की फसल को उकठा यानी विल्ट रोग से बचाने के लिए बुवाई से पहले बीजोपचार की सलाह दी गई है। इसके लिए कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी की 1 ग्राम और थायरम 75 डब्ल्यूपी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है।

उकठा रोग चने में मिट्टी के ज़रिए फैलता है और समय पर नियंत्रण न होने पर फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। बीजोपचार को इस रोग से बचाव का सबसे असरदार और सस्ता तरीका माना जाता है।

बुलेटिन में चने में खरपतवार नियंत्रण के लिए पेन्डीमेथालिन 38.7 सीएस या 30 ईसी की लगभग 1,938 से 2,500 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव का भी सुझाव है। गेहूं में नग्न कंडुआ और पत्ती कंडुआ से बचाव के लिए कार्बोक्सिन या कार्बेन्डाजिम की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से बीजोपचार की सलाह भी दी गई है।

राजस्थान में सरसों की खेती जोधपुर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, सीकर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और बांसवाड़ा समेत कई ज़िलों में होती है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसान नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क कर अपने क्षेत्र के अनुसार सलाह लें, क्योंकि कीट प्रकोप की तीव्रता जगह-जगह अलग हो सकती है।

बुलेटिन में पांच से बारह नवंबर तक के विस्तारित मौसम पूर्वानुमान का भी उल्लेख है, जिसके आधार पर किसान छिड़काव और सिंचाई का समय तय कर सकते हैं।

Priya Verma

Priya Verma, Mausam Breaking की Hindi Editorial Team से जुड़ी हैं। वे विभिन्न राज्यों और शहरों के मौसम पूर्वानुमान, बारिश की संभावना, तापमान में बदलाव और स्थानीय मौसम परिस्थितियों से संबंधित खबरों को सरल हिंदी में प्रस्तुत करती हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य technical weather information को आम पाठक के लिए आसानी से समझने योग्य बनाना है।

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