चक्रवात अर्नब, मौसम ब्रेकिंग (रांची): दिवाली से ठीक पहले बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्नब ने रांची के कुम्हारों की उम्मीदों पर कहर बरपा दिया है। तूफानी बारिश के प्रभाव से रांची और आसपास के इलाकों में धूप की कमी ने मिट्टी के दीये, खिलौने और काली पूजा की प्रतिमाएं बनाने वाले कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
रांची के कुम्हार टोली इलाके में ही लगभग 30 से 35 कुम्हार परिवार रहते हैं। इसके अलावा राहे, बेड़ो, बुंडू और रटू रोड के आसपास भी कई दर्जन परिवार पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के पारंपरिक काम से जुड़े हैं।
मिट्टी के दीये और बर्तन बनाने में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया उन्हें धूप में सुखाना है। चाक पर आकार देने के बाद मिट्टी के उत्पादों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी होता है, लेकिन लगातार बादल छाए रहने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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दिवाली के लिए तैयार किए गए कई ऑर्डर अधूरे पड़े हैं और काली पूजा के लिए बनाई जा रही प्रतिमाओं का निर्माण भी प्रभावित हुआ है। कारीगरों का पूरा ध्यान अब नए माल के उत्पादन से ज्यादा पहले से तैयार दीये और प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने पर है।
अधिकांश कुम्हार परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास बड़े पक्के मकान या पर्याप्त जगह वाले शेड नहीं हैं। ऐसे में बारिश से तैयार माल को बचाना उनके लिए बांस, प्लास्टिक और तिरपाल के सहारे अस्थायी शेड बनाकर चुनौती बन गया है।
जैसे ही आसमान साफ होता है, कुम्हार परिवार के सदस्य दीये और मिट्टी के खिलौने लेकर छतों तथा खुले मैदानों में पहुंच जाते हैं। महिलाएं और बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं ताकि सामान जल्दी से सूख सके।
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कारीगर अब पारंपरिक तरीकों के साथ वैकल्पिक उपाय अपना रहे हैं और छोटे कमरों में पुआल, लकड़ी और कोयले की मदद से दीये सुखा रहे हैं। इससे बिजली और ईंधन पर अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।
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मौसम विभाग की ओर से रांची के लिए जारी अलर्ट और बारिश की स्थिति ने उनकी चिंता बढ़ा दी है, जिससे इस बार बाजार में स्थानीय मिट्टी के दीयों की आवक कम हो सकती है।
बारिश से बचाव के लिए रांची के कारीगर फिलहाल अपने स्तर पर ही इंतजाम कर रहे हैं और उनके लिए कोई ठोस प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। हर साल त्योहारों के समय मौसम की मार से उनका कारोबार प्रभावित होता है, फिर भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं।







