हिमाचल प्रदेश में नौ महीने तक मौसम की मार, 273 में से 175 दिन गंभीर घटनाएं

हिमाचल प्रदेश मौसम गंभीर घटनाएं 2026: हिमाचल प्रदेश में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाएं: जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 273 दिनों में से करीब 175 दिन ऐसी घटनाएं दर्ज हुईं। सीएसई की क्लाइमेट इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश के साथ देश के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है, जबकि मानसून में राज्य में 366 लोगों की मौत हुई।

हिमाचल प्रदेश मौसम गंभीर घटनाएं 2026, Mausam Breaking (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश में मौसम की मार केवल मानसून के कुछ महीनों तक सीमित नहीं रही। साल के शुरुआती नौ महीनों में करीब हर दूसरे दिन प्रदेश को मौसम से जुड़ी किसी गंभीर घटना का सामना करना पड़ा।

जनवरी से सितंबर तक कुल 273 दिनों में से करीब 175 दिन ऐसे रहे, जब हिमाचल में मौसम की गंभीर घटनाएं दर्ज की गईं। देश में उत्तर प्रदेश के साथ हिमाचल उन राज्यों में शामिल रहा, जहां ऐसी घटनाएं सबसे अधिक दिनों तक हुईं।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की क्लाइमेट इंडिया 2026 रिपोर्ट में यह तस्वीर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल और उत्तर प्रदेश में इन नौ महीनों के दौरान करीब 64 फीसदी दिनों में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाएं दर्ज की गईं। देशभर का आंकड़ा देखें तो 273 में से 92 फीसदी दिनों में कहीं न कहीं ऐसी घटनाएं हुईं।

इससे स्पष्ट है कि मौसम का असर केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। हालांकि, सीएसई की रिपोर्ट में हिमाचल में इन घटनाओं के कारण हुई मौतों, फसलों के नुकसान, मकानों के क्षतिग्रस्त होने और पशुओं की मौत के अलग-अलग आंकड़े नहीं दिए गए हैं।

कम बारिश, फिर भी मानसून में 366 लोगों की मौत

हिमाचल में इस साल मानसून के दौरान सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई। इसके बावजूद बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में जान-माल का नुकसान हुआ।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार मानसून के दौरान प्रदेश में 366 लोगों की मौत हुई, 614 लोग घायल हुए और चार लोग लापता हुए। इस दौरान 579 पशुओं की भी जान गई।

मकानों को हुए नुकसान पर नजर डालें तो मानसून के दौरान प्रदेश में 43 पक्के और 101 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा 161 पक्के और 365 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा।

प्रदेश में बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं से कुल 3,412.80 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है।

जिलावार आंकड़ों में शिमला में सबसे अधिक 23 लोगों की मौत दर्ज की गई। चंबा में 22, कांगड़ा में 19, मंडी और लाहौल-स्पीति में 18-18 तथा सिरमौर में 16 लोगों की जान गई।

ये आंकड़े राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और राजस्व विभाग के हैं। इन्हें सीएसई की रिपोर्ट के आंकड़ों से अलग समझना जरूरी है।

देश में भी बढ़ा मौसम की मार वाले दिनों का दायरा

सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों में देशभर में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाओं के कारण 3,220 लोगों की मौत हुई। करीब 42.5 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलों को नुकसान पहुंचा।

इस दौरान 1,28,334 मकान क्षतिग्रस्त हुए और 47,244 पशुओं की मौत हुई। राज्यों में सबसे अधिक 811 मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं।

रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार देश में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाओं वाले दिनों का अनुपात 2022 और 2023 में 86 से 88 फीसदी के बीच था।

वर्ष 2024 में यह 93 फीसदी और 2025 में 99 फीसदी तक पहुंच गया। वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में यह 92 फीसदी रहा।

पिछले पांच वर्षों में देशभर में ऐसी घटनाओं के कारण कुल 16,303 लोगों की मौत हुई।

Aditi Chauhan

Aditi Chauhan, Mausam Breaking के Explainers Desk से जुड़ी हैं। वे मानसून, चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ, El Niño, La Niña और अन्य मौसम प्रणालियों से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले articles तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य जटिल मौसम विज्ञान संबंधी विषयों को आम पाठकों के लिए आसान और उपयोगी बनाना है।

Website

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

चक्रवात अलर्ट

मौसम श्रेणियाँ