भारत में खराब मौसम से 3,220 मौतें, उत्तर प्रदेश सबसे प्रभावित, Mausam Breaking (भारत): मौसम का बदलता मिजाज अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। कभी तेज गर्मी, कभी बेमौसम बारिश, तो कभी अचानक आई बाढ़ और बिजली गिरने की घटनाएं लोगों के लिए खतरा बन रही हैं।
इसका असर गांवों से लेकर शहरों तक दिखाई दे रहा है।
कहीं किसानों की फसल बर्बाद हो रही है, तो कहीं घर और सड़कें तबाह हो रही हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मौसम से जुड़ी इन घटनाओं में हर साल लोगों की जान भी जा रही है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और डाउन टू अर्थ की 'क्लाइमेट इंडिया 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच देश में 273 दिनों में से 251 दिन यानी करीब 92 फीसदी दिनों में किसी न किसी हिस्से में खराब मौसम की घटनाएं दर्ज की गईं। यानी हर 10 में से करीब 9 दिन देश के किसी न किसी इलाके में मौसम की मार पड़ी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में 3,220 लोगों की जान गई, करीब 42.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई और 1,28,334 मकान तबाह हो गए। वहीं, 47,244 पशुओं की भी मौत हुई।
राज्यों में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 811 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद महाराष्ट्र और बिहार का नंबर रहा।
फसल नुकसान के मामले में महाराष्ट्र की स्थिति सबसे खराब रही, जहां 28.3 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। महाराष्ट्र में 286 लोगों की जान गई, जबकि बिहार में 245 लोगों की मौत और 2.3 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल किया गया है। इन दोनों राज्यों में जनवरी से सितंबर के बीच करीब 64 फीसदी दिनों में चरम मौसमी घटनाएं दर्ज हुईं।
क्षेत्रीय स्तर पर उत्तरपश्चिम भारत में 235 दिन और पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में 218 दिन मौसम की मार दर्ज की गई।
रिपोर्ट में 2022 से 2026 तक के पांच सालों का विश्लेषण भी शामिल है। इस दौरान खराब मौसम की घटनाओं में 16,303 लोगों की मौत हुई और करीब 2.06 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई।
खराब मौसम वाले दिनों का आंकड़ा 2022-23 में 86 से 88 फीसदी के बीच था, जो 2024 में 93 फीसदी और 2025 में 99 फीसदी तक पहुंच गया। 2026 के पहले नौ महीनों में यह 92 फीसदी रहा।
2025 में सबसे ज्यादा 4,064 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
2024 से 2026 के बीच खेती को हुए कुल नुकसान का 82 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दर्ज किया गया, जो बताता है कि खराब मौसम का असर जिंदगी के साथ-साथ खेती पर भी लगातार बढ़ रहा है।
साल 2026 के मौसम से जुड़े आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। फरवरी 2026 भारत में 1901 के बाद सबसे सूखा फरवरी रहा, जबकि बीते 125 सालों में यह चौथा सबसे गर्म फरवरी दर्ज किया गया।
दक्षिणपश्चिम मानसून के दौरान देश में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई, फिर भी मानसून के 122 दिनों में देश के किसी न किसी हिस्से में भारी बारिश, बाढ़ या भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं।




