दिल्ली में कृत्रिम बारिश की तैयारी, दिवाली और छठ के बाद होगा प्रयोग

दिल्ली कृत्रिम बारिश क्लाउड सीडिंग: प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने फिर से कृत्रिम बारिश की योजना पर काम शुरू किया है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के आसपास पिछले 15 दिनों में दो ट्रायल हुए हैं और दिवाली व छठ के बाद कुछ और प्रयोग होने की संभावना है। पिछले साल दो दौर के प्रयोग के बावजूद बारिश नहीं हुई थी।

दिल्ली कृत्रिम बारिश क्लाउड सीडिंग, Mausam Breaking (दिल्ली): दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश कराने की योजना पर सरकार ने फिर से काम शुरू कर दिया है। पिछले 15 दिनों में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के आसपास क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल हुए हैं।

दिवाली और छठ के बाद कुछ और प्रयोग किए जाने की संभावना है। हालांकि, पिछले साल दो दौर के प्रयोग के बावजूद बारिश नहीं होने और सरकार की किरकिरी के बाद इस बार सरकार सार्वजनिक रूप से अभियान की घोषणा करने से बच रही है।

दिल्ली सरकार ने पिछले साल सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए आईआईटी कानपुर के सहयोग से क्लाउड सीडिंग परियोजना शुरू की थी। इसके लिए पर्यावरण विभाग और आईआईटी कानपुर के बीच समझौता हुआ था।

अक्तूबर में दो दौर के ट्रायल किए गए, जिनमें सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड वाले रासायनिक फ्लेयर छोड़े गए थे। इसके बावजूद बारिश नहीं हुई।

सरकार ने दावा किया था कि बारिश नहीं होने के बावजूद लक्षित क्षेत्रों में प्रदूषणकारी कणों का स्तर घटा था। पिछले साल दिल्ली सरकार ने क्लाउड सीडिंग के परीक्षणों के लिए करीब 3.21 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था।

एक उड़ान या परीक्षण पर लगभग 55 लाख रुपये तक का खर्च आता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में यदि करीब 12 बार क्लाउड सीडिंग की जाती है, तो कुल खर्च लगभग 25 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। क्लाउड सीडिंग में अनुकूल बादलों के भीतर सिल्वर आयोडाइड या सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थ छोड़े जाते हैं, जिससे पानी की बूंदें या बर्फ के क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया तेज होती है।

इसके लिए वातावरण में पर्याप्त नमी और अनुकूल बादलों का होना जरूरी है। ऐसे में कृत्रिम बारिश प्रदूषण नियंत्रण का स्थायी समाधान नहीं, बल्कि अनुकूल मौसमी परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाने वाला एक अस्थायी उपाय है।

Priya Verma

Priya Verma, Mausam Breaking की Hindi Editorial Team से जुड़ी हैं। वे विभिन्न राज्यों और शहरों के मौसम पूर्वानुमान, बारिश की संभावना, तापमान में बदलाव और स्थानीय मौसम परिस्थितियों से संबंधित खबरों को सरल हिंदी में प्रस्तुत करती हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य technical weather information को आम पाठक के लिए आसानी से समझने योग्य बनाना है।

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